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Humsafar Shayari 2 Line With Image in Hindi

राह भी तुम हो राहत भी तुम ही हो
राह भी तुम हो राहत भी तुम ही हो,
मेरे सुख और दुख को बांटने वाली, हमसफर भी तुम ही हो।



मेरे साथ जुगनू है हमसफ़र मगर इस शरर की बिसात क्या
मेरे साथ जुगनू है हमसफ़र, मगर इस शरर की बिसात क्या,
ये चराग़ कोई चराग़ है, न जला हुआ न बुझा हुआ।



तलाश कर मेरी मोहब्बत को अपने दिल में ए मेरे हमसफ़र
तलाश कर मेरी मोहब्बत को, अपने दिल में ए मेरे हमसफ़र,
दर्द हो तो समझ लेना की, मोहब्बत अब भी बाकि है।



यह भी देखिए:
रात तनहाईयों की दुश्मन है हर सफ़र हमसफ़र से रोशन है
रात तनहाईयों की दुश्मन है, हर सफ़र हमसफ़र से रोशन है,
मौज के पास जो किनारा है, वो किनारा हसीन लगता है।



गगन से भी ऊंचा मेरा प्यार है तुझ पर मिटूंगा ये इकरार है
गगन से भी ऊंचा मेरा प्यार है, तुझ पर मिटूंगा ये इकरार है,
तू इतना समझ ले मेरे हमसफ़र, तेरे प्यार से मेरा संसार है।



हमसफ़र मेरे हमसफ़र पंख तुम परवाज़ हम
हमसफ़र मेरे हमसफ़र पंख तुम परवाज़ हम,
ज़िंदगी का साज़ हो तुम साज़ की आवाज़ हम।



ना तो कारवाँ की तलाश है ना तो हमसफ़र की तलाश है
ना तो कारवाँ की तलाश है, ना तो हमसफ़र की तलाश है,
मेरे शौक़-ए-खाना खराब को, तेरी रहगुज़र की तलाश है।



यह भी देखिए:
अब वक्त भी कह रहा है मुझे अपनी हमसफर से मिलवाओ
अब वक्त भी कह रहा है, मुझे अपनी हमसफर से मिलवाओ,
तुम किसी का प्यार पाओ, और किसी पर प्यार लुटाओ।



उम्र भर का पसीना, उसकी गोद मे सुख जायेगा
उम्र भर का पसीना, उसकी गोद मे सुख जायेगा,
हमसफर क्या चीज है, ये बुढापे मे समझ आयेगा।



मेरे हमसफ़र मेरे पास आ मुझे शोहरतें का कोई काम नहीं
मेरे हमसफ़र मेरे पास आ, मुझे शोहरतें का कोई काम नहीं,
जो तू मुझे मिल जाये तो, मुझे किसी बात की हया न हो।



बस सफर हमारा है बाकी सफर के हिस्से है
बस सफर हमारा है, बाकी सफर के हिस्से है,
जो साथ चले वो हमसफर, जो छुट गए वो किस्से है।



सुन मेरे हमसफ़र क्या तुझे इतनी सी भी खबर
सुन मेरे हमसफ़र, क्या तुझे इतनी सी भी खबर,
की तेरी साँसे चलती जिधर,रहूँगा बस वही उम्र भर।



फिरते हैं कब से दरबदर अब इस नगर अब उस नगर
फिरते हैं कब से दरबदर, अब इस नगर अब उस नगर,
एक दूसरे के हमसफ़र, मैं और मेरी आवारगी।



मेरे रास्ते मेरी मंजिलें मेरे हमसफ़र मेरे हमनशीं
मेरे रास्ते मेरी मंजिलें, मेरे हमसफ़र मेरे हमनशीं,
मुझे लूट कर सभी चल दिए, मेरे पास कुछ भी बचा नहीं।



तुझे क्या ख़बर मेरे हमसफ़र मेरा मरहबा कोई और है
तुझे क्या ख़बर मेरे हमसफ़र, मेरा मरहबा कोई और है,
मुझे मंज़िलों से गुरेज़ है, मेरा रास्ता कोई और है।



सफर में चलते चलते अक्सर हाथ छूड़ जाते हैं
सफर में चलते चलते, अक्सर हाथ छूड़ जाते हैं,
जुदा कहां हो जाते हैं हमसफ़र, मगर हां रूठ जाते हैं।